आवासीय स्कूल के प्राचार्य और हॉस्टल वार्डन को हटाया, सुसाइड की कोशिश को दबाने पर कार्रवाई

Jan 17, 2026 - 08:14
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आवासीय स्कूल के प्राचार्य और हॉस्टल वार्डन को हटाया, सुसाइड की कोशिश को दबाने पर कार्रवाई

मोहला/रायपुर.

केंद्रीय एकलव्य आवासीय विद्यालय में अध्यनरत नाबालिग छात्रों के साथ हैवानियत के मामले में प्राचार्य और हॉस्टल वार्डन को प्रारंभिक तौर पर प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए हटा दिया गया है। वही छात्रों को बर्बरता पूर्वक मारने वाले मुख्य आरोपी एक पीटीआई दो लेक्चर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

इधर नाबालिग बच्चियो के जहर पीने के मामले को प्रशासनिक अधिकारी पारिवारिक कलह बताकर इस संवेदनशील मामले को स्थानीय स्तर पर दफन करने के प्रयास में हैं। इन सब घटनाक्रम के बीच शुक्रवार को बाल संरक्षण आयोग की टीम भी मामले का संज्ञान लेते हुए एकलव्य आवासीय परिसर में दाखिल हुई। उल्लेखनीय है कि, एकलव्य आवासीय विद्यालय में आदिवासी छात्रों के साथ बर्बरता किये जाने और नाबालिग बच्चियों के द्वारा आत्महत्या करने का प्रयास के मामले को दबाया जा रहा था। कलेक्टर तूलिका प्रजापति के निर्देश में 12 जनवरी सोमवार रात 9 बजे के लगभग अपर कलेक्टर जीआर मरकाम की अध्यक्षता में डिप्टी कलेक्टर शुभांगी गुप्ता, एसडीएम हेमेंद्र भूआर्य, अंबागढ़ चौकी तहसीलदार अनुरिमा टोप्पो, आरआई तामेश्वरी इस्दा की टीम आवासीय केंद्रीय विद्यालय एकलव्य में दाखिल होकर पड़ताल शुरू की।

छात्रों ने सामूहिक रूप से उनके ऊपर हो रहे लगातार अवमानीय बर्ताव, मारपीट के संबंध में एक-एक करके बयान दर्ज कराया। इस मामले में अभी जांच जारी है। प्रारंभिक तौर पर संबंधित हॉस्टल वार्डन तथा प्राचार्य को एकलव्य के चार्ज से पृथक कर दिया गया है, वहीं छात्रों के साथ मारपीट करने आरोपों में घिरे एक पीटीआई और दो लेक्चरर्स को कारण बताओ नोट जारी किया गया है। जांच अधिकारी अपर कलेक्टर जी आर मरकाम ने 6 दिनों के भीतर एक के बाद एक जान देने के लिए आतुर हुई नाबालिग आदिवासी छात्राओं के मामले को पारिवारिक कलह बताया है। जबकि आत्महत्या का प्रयास करने वाले छात्राओं को उनके घर भेज दिया गया है।

नाबालिग छात्रों से बर्बरता के मामले में एक्शन लिया जा रहा है, परंतु मासूम बच्चियां क्यों एक के बाद एक जान देना चाह रही थीं? इसकी निष्पक्ष जांच के नाम पर बेहद शंसय की स्थिति बनी हुई है। जहर खुरानी के मामले में पुलिस कोई भी कदम बढ़ाना नहीं चाह रही है, विभागीय तौर पर उक्त मामले को दबाने का प्रयास हो रहा है।

 

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