नस्ल सुधार कर बाघों का बढेगा कुनबा, एमपी और महाराष्ट्र से आएंगे बाघ-बाघिन

Feb 3, 2026 - 13:44
 0  9
नस्ल सुधार कर बाघों का बढेगा कुनबा, एमपी और महाराष्ट्र से आएंगे बाघ-बाघिन

जयपुर.

राजस्थान में बाघों की आबादी बढ़ाने और जीन पूल को बेहतर बनाने के लिए महाराष्ट्र एवं मध्य प्रदेश से पांच बाघों को राज्य के रामगढ़ विषधारी एवं मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में लाने का फैसला किया गया है। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के दिशा-निर्देश, राष्ट्रीय टाइगर कंजर्वेशन अथारिटी की मंजूरी और तीनों राज्यों की आपसी सहमति के बाद यह फैसला लिया गया।

पिछले दिनों मध्य प्रदेश के पेंच टाइगर रिजर्व से तीन वर्ष की बाधिन रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में छोड़ा गया था। आगामी कुछ दिनों में एक और बाघिन मध्य प्रदेश से लाई जाएगी। इस बाघिन को सड़क मार्ग से लाया जाएगा। इन बाघों को रेडियो कालर लगाकर कुछ दिन वनकर्मियों की निगरानी में रखा जाएगा और फिर खुले जंगल में छोड़ा जाएगा। जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश के पेंच, बांधवगढ़ एवं कान्हा टाइगर रिजर्व से राजस्थान में बाघ लाए जाएंगे। मकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के क्षेत्रीय निदेशक सुगनाराम जाट ने बताया कि अंतरराज्यीय स्थानांतरण के तहत 15 फरवरी से पहले एक बाघिन को मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से लेकर आने की योजना है।

करीब सात सौ किलोमीटर का सफर सड़क मार्ग से 12 घंटे में तय किया जाएगा। इस संबंध में राजस्थान और मध्य प्रदेश के वन विभाग के अधिकारियों के बीच लगातार बात जारी है। पिछले साल दिसंबर में एक बाघिन को स्थानांतरित किया गया था। इस कारण आवश्यक है बाघों का अंतरराज्यीय स्थानांतरणबाघों या किसी भी प्रजाति में इनब्रीडिंग का मतलब होता है करीबी रिश्तेदारों का आपस में प्रजनन।

जब बाघों की आबादी कम हो जाती है तो शेष बचे हुए बाघ-बाघिन करीबी रिश्तेदार होते हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, इनब्रीडिंग से बच्चों में जन्मजात समस्याएं हो सकती हैं। जैसे दिल की बीमारी, पैरों की कमजोरी, आकार छोटा होना अथवा शिकार करने की क्षमता कम होना। बाघों में रोगों से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है। बाघिन में गर्भधारण की समस्याएं होती है, कई बार शावकों की जन्म के समय ही मौत हो जाती है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0