51 हादसों में 18 मौतें, टाइगर कॉरीडोर बरेठा घाट होगा फोर-लेन, केंद्र से मिली मंजूरी

Mar 21, 2026 - 04:14
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51 हादसों में 18 मौतें, टाइगर कॉरीडोर बरेठा घाट होगा फोर-लेन, केंद्र से मिली मंजूरी

बैतूल 
मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के बरेठा घाट से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-46 (NH-46) के महत्वपूर्ण हिस्से को अब फोरलेन बनाने की मंजूरी मिल गई है। यह वही इलाका है, जहां पिछले दो साल में सड़क हादसे हुए और 18 लोगों की जान चली गई। लगातार बढ़ते हादसों और ट्रैफिक दबाव को देखते हुए इस सड़क को चौड़ा और सुरक्षित बनाने की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। यह सड़क ग्वालियर से बैतूल तक करीब 634 किलोमीटर लंबा एक अहम हाईवे है, जो पूरी तरह मध्यप्रदेश के अंदर आता है। यह राज्य के उत्तर और दक्षिण हिस्सों को जोड़ने वाला बड़ा मार्ग है और भोपाल से नागपुर जाने वाले कॉरिडोर का भी हिस्सा है। इस पर ज्यादातर काम पूरा हो चुका है, लेकिन बरेठा घाट समेत करीब 21 किलोमीटर का हिस्सा बाकी था। 

हाईकोर्ट के आदेश के बाद शुरू होगा काम 
दरअसल, यह इलाका टाइगर कॉरिडोर में आता है, यानी यहां से जंगली जानवरों की आवाजाही होती है। इसी कारण 1 अप्रैल 2022 को हाईकोर्ट ने यहां सड़क निर्माण पर रोक लगा दी थी। इसके बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को वन्यजीव और पर्यावरण से जुड़ी कई मंजूरियां लेनी पड़ीं। अब वाइल्डलाइफ बोर्ड और केंद्र सरकार से सभी जरूरी अनुमति मिल चुकी है। जैसे ही हाईकोर्ट से स्टे हटाने का अंतिम आदेश आएगा, निर्माण काम शुरू कर दिया जाएगा।

संकरी और घुमावदार सड़क, लगता है जाम 
बरेठा घाट का यह हिस्सा अभी केवल दो लेन का है, जो बहुत संकरा और घुमावदार है। यहां भारी वाहनों का दबाव ज्यादा रहता है, जिससे अक्सर जाम की स्थिति बन जाती है। साथ ही, दो जगह ऐसे ब्लैक स्पॉट हैं, जहां बार-बार हादसे होते हैं। कम चौड़ाई, तेज मोड़, ढलान और कम विजिबिलिटी इस रास्ते को और खतरनाक बनाते हैं।

ब्लैक स्पॉट को ठीक करने भी बनाया प्लान 
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, जनवरी 2022 से दिसंबर 2024 के बीच यहां 51 एक्सीडेंट हुए, जिनमें 18 लोगों की मौत हुई और करीब 62 लोग घायल हुए। कई छोटे हादसे तो रिकॉर्ड में भी नहीं आ पाते, जिससे असली स्थिति और गंभीर हो सकती है। अब इस पूरे हिस्से को 4 लेन में बदला जाएगा, जिससे सड़क चौड़ी होगी और ट्रैफिक आसानी से चल सकेगा। इसके साथ ही ब्लैक स्पॉट्स को ठीक करने के लिए खास प्लान बनाया गया है। यहां 3 छोटे पुल (माइनर ब्रिज), 38 बॉक्स कलवर्ट, 1 रेलवे अंडरब्रिज, 2 रोड ओवरब्रिज और 1 व्हीकल अंडरपास बनाए जाएंगे। इससे ट्रैफिक सुचारू होगा और दुर्घटनाओं में कमी आएगी।

वन्य जीवों की सुरक्षा का ख्याल, बनेंगे 10 अंडरपास, 1 ओवरपास 
सबसे खास बात यह है कि इस प्रोजेक्ट में वन्यजीवों की सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा गया है। जानवरों की आवाजाही के लिए 10 अंडरपास और 1 ओवरपास बनाए जाएंगे, ताकि वे बिना खतरे के सड़क पार कर सकें। इसके अलावा सड़क पर क्रैश बैरियर, साइन बोर्ड, रंबल स्ट्रिप, नॉइज बैरियर और फेंसिंग जैसी सुविधाएं भी लगाई जाएंगी, जिससे यात्रियों और पर्यावरण दोनों की सुरक्षा हो सके।

पर्यटन स्थलों पर पहुंच भी बेहतर होगी 
इस परियोजना के पूरा होने से न सिर्फ सड़क हादसे कम होंगे, बल्कि व्यापार, पर्यटन और आवागमन भी आसान हो जाएगा। सांची, भीमबेटका, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुंच बेहतर होगी। साथ ही, उद्योगों और व्यापार को भी इसका बड़ा फायदा मिलेगा। कुल मिलाकर, बरेठा घाट का यह फोरलेन प्रोजेक्ट आम लोगों के लिए सुरक्षित और आसान सफर की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा। 

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