गुप्त नवरात्रि 2026: 15 जुलाई से शुभारंभ, माता की सवारी क्या देती है संकेत? जानें देश-दुनिया पर असर

Jul 10, 2026 - 04:14
 0  6
गुप्त नवरात्रि 2026: 15 जुलाई से शुभारंभ, माता की सवारी क्या देती है संकेत? जानें देश-दुनिया पर असर

 हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष में चार बार नवरात्रि आती हैं लेकिन आषाढ़ गुप्त नवरात्रि को साधना और देवी आराधना के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है. इस साल इसकी शुरुआत आषाढ़ शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से होगी. 9 दिनों तक भक्त मां दुर्गा की उपासना, मंत्र जाप, तंत्र साधना और विशेष अनुष्ठान करते हैं. साथ ही 10 महाविद्याओं की आराधना भी की जाती है, जिससे आध्यात्मिक उन्नति और देवी कृपा प्राप्त होने की मान्यता है। 

मान्यता है कि नवरात्रि के दौरान माता रानी पूरे 9 दिनों के लिए धरती पर अपने भक्तों को आशीर्वाद देने लिए आती हैं. हर बार माता की सवारी अलग होती है. माता रानी किस वाहन पर सवार होकर आती हैं और जाती हैं, इसका प्रभाव इस लोक पर जरूर पड़ता है. उज्जैन के ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज से जानते हैं कि इस बार माता रानी आषाढ़ नवरात्रि में किस वाहन पर सवार होकर आ रही हैं। 

शुभ संयोग में गुप्त नवरात्रि की शुरुआत
वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा यानी 15 जुलाई से गुप्त नवरात्रि का आरंभ होगा. खास बात यह है कि इसका शुभारंभ 12 साल बाद गजकेसरी योग और बुध पुष्य योग के दुर्लभ संयोग में हो रहा है. 15 जुलाई को पुष्य नक्षत्र और कर्क राशि में चंद्रमा की स्थिति रहेगी. चंद्रमा और गुरु की युति से गजकेसरी योग बनेगा. सामान्यतः गुरु का एक ही राशि में आगमन 12 वर्ष में होता है, इसलिए यह संयोग बेहद विशेष माना जा रहा है। 

किस पर सवार होकर आएंगी मां?
मां जगत जननी की आराधना की शुरुआत नवरात्रि के जिस वार से शुरू होती है, उसी के आधार पर माता के वाहन का निर्धारण होता है. बुधवार से शुरुआत होने पर माता नौका पर सवार होकर आती हैं. देवी भागवत पुराण के अनुसार, यह वाहन अच्छी वर्षा, समृद्धि और कृषि में उन्नति का प्रतीक है. कृषि प्रधान महाकौशल अंचल के लिए इसे विशेष रूप से शुभ माना जा रहा है. मान्यता है कि माता का नौका पर आगमन भक्तों के कष्ट दूर करने के साथ खुशहाली का संदेश देता है। 

धार्मिक नगरी में होगी विशेष पूजा
गुप्त नवरात्रि के दौरान महाकाल की नगरी उज्जैन के प्राचीन मंदिरों जैसे- हरसिद्धि मंदिर, चौंसठ योगिनी, बगलामुखी, गढ़कलिका मंदिर सहित प्रमुख सिद्धपीठों में विशेष पूजन-अनुष्ठान होंगे. 9 दिन तक मां काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी और बगलामुखी समेत 10 महाविद्याओं की साधना की जाएगी. पर्व का समापन नवमी के हवन और पूर्णाहुति के साथ होगा। 

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0