छत्तीसगढ़–महाराष्ट्र सीमा पर बाघ का आतंक: दिन-दहाड़े मवेशी पर हमला, ग्रामीण पेड़ पर चढ़कर बची जान

Mar 8, 2026 - 12:14
 0  8
छत्तीसगढ़–महाराष्ट्र सीमा पर बाघ का आतंक: दिन-दहाड़े मवेशी पर हमला, ग्रामीण पेड़ पर चढ़कर बची जान

 मोहला-मानपुर

जिला अंतर्गत छत्तीसगढ़–महाराष्ट्र सीमा में बाघ का आतंक एक बार फिर सामने आया है। बीते 12 फरवरी से अब तक एक माह के भीतर एक ग्रामीण समेत दो मवेशियों को मौत के घाट उतार चुके बाघ की इस बार औंधी तहसील क्षेत्र अंतर्गत बागडोंगरी ग्राम पंचायत क्षेत्र में आमद हुई, जहां 6 मार्च को दिन-दहाड़े बाघ ने आतंक मचाया और मवेशियों पर हमला किया। वहीं 6 और 7 मार्च की दरमियानी रात बाघ इंसानी बस्ती में पहुंच गया, जिससे ऐसे खौफनाक हालात बन गए कि ग्रामीणों को पेड़ पर चढ़कर अपनी जान बचानी पड़ी।

बता दें, मानपुर दक्षिण वन परिक्षेत्र अंतर्गत औंधी क्षेत्र के बागडोंगरी गांव निवासी ग्रामीण का बैल, जो गांव के आसपास चर रहा था, उस पर बाघ ने हमला कर दिया। जैसे-तैसे बाघ के चंगुल से छूटकर बैल अपने पालक के घर पहुंचा तो पता चला कि बैल के शरीर में बाघ के पंजों की खरोंचें हैं और बाघ के दांतों ने भी बैल की गर्दन में छेद कर दिए हैं। यही नहीं, बाघ ने इसी बागडोंगरी ग्राम पंचायत के आश्रित मोहल्ले मरकाटोला में भी आतंक मचाया, जहां खेत में भुट्टे की फसल की रखवाली के लिए घूम रहे दो ग्रामीणों को इस बाघ ने दौड़ाया। हालांकि ये ग्रामीण फुर्ती से एक पेड़ पर चढ़ गए, जिससे वे बाघ के हमले से बच गए, लेकिन जिस पेड़ पर ये ग्रामीण चढ़े, उसके इर्द-गिर्द ही बाघ मंडराते हुए ग्रामीणों पर हमले की फिराक में जुटा रहा। इसी बीच गांव में लोगों को इस हालात की जानकारी लगी और बड़ी संख्या में ग्रामीण टॉर्च जलाते हुए मौके की ओर बढ़े। तब जाकर टॉर्च की रोशनी और ग्रामीणों की आहट से घबराकर बाघ मौके से भागा और पेड़ पर चढ़े ग्रामीण सुरक्षित नीचे उतर सके।

क्षेत्रवासी ग्रामीण बाघ की लगातार आमद और उसके द्वारा किए जा रहे शिकार से खासे भयभीत हैं। यह महुआ जैसे अहम वनोपज के संग्रहण का दौर है, लेकिन महुआ संग्रहण और बिक्री से आय अर्जित करने वाले ग्रामीणों के सामने बाघ के भय के चलते महुआ व अन्य वनोपज के लिए जंगल जाना दूभर होता दिख रहा है। दूसरी ओर वन महकमा भी अपनी यथासंभव कसरतों में जुटा हुआ है। ट्रैप कैमरों का उपयोग किया जा रहा है। वन महकमे ने ग्रामीणों से भी अपील की है कि सुरक्षित रहें, सतर्क रहें। क्योंकि यह केवल वनोपज संग्रहण का मसला नहीं है, बल्कि स्कूली बच्चे भी जंगल के रास्ते स्कूलों का सफर तय करते हैं। और बाघ की चहलकदमी से स्कूली बच्चों की राह भी खौफजदा प्रतीत हो रही है।

गौरतलब है कि बाघ का आतंक इस इलाके में बीते करीब डेढ़ पखवाड़े से फैला हुआ है। बीते 12 फरवरी को बाघ ने गहनगट्टा गांव में एक मवेशी का शिकार किया था। इसके बाद बाघ ने इसी औंधी इलाके से लगे महाराष्ट्र के केहकावाही में एक ग्रामीण को मार डाला था। यही नहीं, ग्रामीण को मारने के अगले रोज फिर छत्तीसगढ़ में आकर पीटेमेटा गांव में एक मवेशी को भी बाघ ने शिकार बनाया था। इन घटनाक्रमों के बाद अब बाघ ने बागडोंगरी इलाके में आतंक मचाया है।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0