पहली बार ऑनलाइन ऐप से होगी गिद्ध गणना

Feb 20, 2026 - 16:44
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पहली बार ऑनलाइन ऐप से होगी गिद्ध गणना

भोपाल 

प्रदेश व्यापी गिद्ध गणना 2025-26 में शीतकालीन गणना 20 फरवरी से 22 फरवरी 2026 तक सूर्योदय से सुबह 9.00 बजे तक प्रदेश के सभी 16 वृत्त एवं 09 टाईगर रिजर्व में गिद्ध गणना का कार्य वन विभाग के अधिकारियों/कर्मचारियों, डब्लू डब्लू.एफ., डब्लू.आई.आई. के प्रतिभागियों के अतिरिक्त स्वंय सेवक एवं फोटोग्राफरों के द्वारा मिलकर किया जा रहा है। मध्यप्रदेश में प्रदेशव्यापी गिद्ध गणना की शुरूआत वर्ष-2016 से की गई थी जिसमें 7,028 गिद्धों का आंकलन किया गया था। गिद्ध गणना वर्ष-2025 में शीतकालीन गणना में 12710 एवं ग्रीष्मकालीन गणना वर्ष-2025 में 9509 गिद्धों का आंकड़ा प्राप्त हुआ था।

मध्यप्रदेश में कुल 07 प्रजातियों के गिद्ध पाये जाते हैं, जिसमें से 04 प्रजातियों स्थानीय हैं एवं 03 प्रजातियाँ प्रवासी हैं, जो ठंड के समाप्त होते ही वापस चली जाती हैं। प्रथम चरण की गणना तब की जाती है जब उपरोक्त सभी प्रजातियों के गिद्ध घोंसले बनाकर अपने अंडे दे चुके होते हैं या देने की तैयारी में होते हैं। इसी प्रकार से फरवरी माह आने तक इन घोंसलों में अंडों से नवजात गिद्ध निकल चुके होते हैं तथा वे उड़ने की तैयारी करते होते हैं। इसलिये गणना करने के लिये शीत ऋतु का अंतिम समय उचित होता है जिससे स्थानीय तथा प्रवासी गिद्धों की गणना हो जाए।

इस बार गिद्धों की गणना के लिये प्रथम बार ऑनलाइन ऐप तयार किया गया है, जिसके माध्यम से गिद्धों की गणना की जा रही है। "ऐप" के माध्यम से गणना किये जाने पर आंकड़ों के संकलन एवं रिपोर्ट तैयार करने में आसानी होगी। गत वर्षों में गणना ऑफलाइन की जाती रही है। ऐप के माध्यम से गणना किये जाने के लिये मास्टर ट्रेनर्स, अशासकीय संस्थाओं एवं अधिकारियों/कर्मचारियों को ऑनलाईन प्रशिक्षण प्रदान किया गया है।

गिद्धों की गणना के लिये गणनाकर्मी एवं स्वयंसेवक आदि सूर्योदय के तत्काल बाद प्रथम चरण में चयनित गिद्धों के घोंसलों के समीप पहुंच जाएंगे और घोंसलों के आसपास बैठे गिद्धों एवं उनके नवजातों की गणना ऐप के माध्यम से करेंगे। गणना के दौरान इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि केवल आवास/विश्राम स्थलों पर बैठे हुए गिद्धों को ही गणना में लिया जाए। उड़ते हुए गिद्धों को गणना में नहीं लिया जाता है। इस वर्ष वन विभाग के कर्मचारियों के साथ-साथ पूरे प्रदेश के विभिन्न स्थानों में पक्षी विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, छात्र, फोटोग्राफर एवं स्थानीय नागरिक इस गणना में भाग ले रहे हैं। गणना उपरांत डाटा संकलन का कार्य वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में किया जावेगा।

 

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