नई दिल्ली-भोपाल शताब्दी एक्सप्रेस में लगा नया सिस्टम: हादसे रुकेंगे, सफर होगा और सुरक्षित

Sep 11, 2025 - 05:44
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नई दिल्ली-भोपाल शताब्दी एक्सप्रेस में लगा नया सिस्टम: हादसे रुकेंगे, सफर होगा और सुरक्षित

ग्वालियर
देश की पहली शताब्दी एक्सप्रेस का दर्जा प्राप्त नई दिल्ली से ग्वालियर होते हुए भोपाल के रानी कमलापति स्टेशन तक जाने वाली ट्रेन को नए स्वचालित दरवाजों से लैस कर दिया गया है। दरवाजों को अब इमरजेंसी बटन और वैक्यूम लॉकिंग सिस्टम से जोड़ दिया गया है। गति पकड़ते ही ट्रेन के दरवाजे बंद हो जाएंगे। ट्रेन जब अगले स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर पहुंचेगी या आउटर में रुकेगी, तभी ट्रेन के गेट खुल पाएंगे। इसके लिए ट्रेन के रैक में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है, सिर्फ दरवाजों को बदलकर उनमें नया सिस्टम लगाया गया है।

नए सिस्टम से रुकेंगे हादसे
दरअसल, शताब्दी एक्सप्रेस में आरक्षण का सिस्टम कुछ ऐसा है कि एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन के बीच बुक होने वाली ज्यादातर सीटें एक ही कोच में आवंटित की जाती हैं। ऐसे में स्टेशन पर उतरने के लिए यात्रियों की भीड़ जुट जाती है। कई यात्री जल्दी उतरने के चक्कर में प्लेटफॉर्म आने से पहले ही दरवाजा खोल देते थे और हादसों का शिकार हो जाते थे। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नई व्यवस्था की जा रही है। ऐसी ही व्यवस्था हजरत निजामुद्दीन से ग्वालियर होते हुए वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी स्टेशन जाने वाली गतिमान एक्सप्रेस में भी है। चूंकि ये दोनों ट्रेनें एक जैसे रैक के साथ ही संचालित होती हैं, इसलिए इस रूट पर गतिमान के बाद शताब्दी एक्सप्रेस को भी इस सिस्टम से जोड़ा गया है। रेल मंडल झांसी के जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह का कहना है कि इस बदलाव से सफर भी सुरक्षित रहेगा और दुर्घटना की आशंका कम होगी।

लोको पायलट के पास कंट्रोल, प्लेटफॉर्म की तरफ के गेट ही खुलेंगे
इन दरवाजों का कंट्रोल लोको पायलट और गार्ड के पास रखा गया है। यह भी सुनिश्चित किया गया है कि जब ट्रेन किसी स्टेशन पर पहुंचती है, तो सिर्फ उसी दिशा के दरवाजे खुलें जिस तरफ प्लेटफॉर्म रहेगा। दूसरी दिशा के दरवाजों को बिना लोको पायलट की मर्जी के नहीं खोला जा सकता है। इससे इन लक्जरी ट्रेनों में अनावश्यक प्रवेश को भी रोका जा सकता है।

बेस किचन हुई शिफ्ट, खाने का समय भी बदला
शताब्दी एक्सप्रेस में यात्रा कर रहे यात्रियों के खाने के समय में भी परिवर्तन किया गया है। पहले ग्वालियर में इस ट्रेन का बेस किचन था और यहीं से खाना ट्रेन में भेजा जाता था। ऐसे में यात्रियों को झांसी स्टेशन गुजरने के बाद लगभग साढ़े 11 बजे खाना परोसा जाता था। अब बेस किचन को झांसी में ही शिफ्ट कर दिया गया है। ऐसे में यात्रियों को अब ललितपुर गुजरने के बाद लगभग साढ़े 12 बजे खाना परोसा जाता है। भोपाल से लौटते समय ग्वालियर स्टेशन से ट्रेन गुजरने के बाद खाना परोसना शुरू किया जाता है।

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