84 की उम्र में भी देशसेवा का जज्बा, पार्कों से कूड़ा हटाकर मिसाल बने रिटायर्ड नेवी अफसर

May 18, 2026 - 16:14
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84 की उम्र में भी देशसेवा का जज्बा, पार्कों से कूड़ा हटाकर मिसाल बने रिटायर्ड नेवी अफसर

मोहाली.

समाज में बदलाव लाने के लिए उम्र नहीं, बल्कि मजबूत इरादों की जरूरत होती है। मोहाली के फेज-2 निवासी बीएस संधू अपनी जिंदगी से इस बात को साबित कर रहे हैं। 84 वर्ष की उम्र में भी उनका सेवा भाव युवाओं के लिए मिसाल बना हुआ है। एक समय देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले संधू अब शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने के मिशन में जुटे हैं।

नेवी से सेवानिवृत्त बीएस संधू वर्ष 1971 के भारत पाक युद्ध के वीर सैनिक रह चुके हैं। उस दौर में उन्होंने देश की रक्षा के लिए मोर्चा संभाला और अब रिटायरमेंट के बाद नागरिक जीवन में समाजसेवा को अपना लक्ष्य बना लिया है। पिछले चार से पांच वर्षों से वह लगातार मोहाली के पार्कों को स्वच्छ और सुंदर बनाने के मिशन में जुटे हैं।

उनकी यह छोटी सी पहल अब एक बड़े संदेश का रूप ले चुकी है। संधू न केवल अपने नियमित पार्क की सफाई करते हैं, बल्कि आसपास के अन्य पार्कों और सार्वजनिक स्थानों पर भी समय-समय पर सफाई अभियान चलाते हैं।

हर सुबह थैला लेकर करते हैं पार्क की सफाई
हर सुबह जब अधिकांश लोग पार्क में केवल टहलने या व्यायाम के लिए पहुंचते हैं, तब संधू जी अपने साथ एक थैला लेकर निकलते हैं। उनकी नजर पार्क में फैली गंदगी पर रहती है। रास्ते में जहां भी पन्नियां, प्लास्टिक की बोतलें, कागज या अन्य कूड़ा-कचरा दिखाई देता है, वह उसे खुद उठाकर थैले में जमा करते हैं। इसके बाद कूड़े को सही स्थान पर डालते हैं, ताकि पार्क साफ-सुथरा बना रहे। और अनुशासन देखकर स्थानीय लोग भी प्रभावित हो रहे हैं और स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ रही है। बीएस संधू का कहना है कि अगर हर नागरिक घर के बाहर और आसपास की सफाई की जिम्मेदारी खुद उठाए, तो पूरा शहर साफ और सुंदर बन सकता है।

पार्क में गंदगी देखकर होती है चिंता: बीएस संधू
बीएस संधू बताते हैं कि पहले वह अपने 5 से 7 दोस्तों के साथ रोजाना सैर करने आते थे। लेकिन धीरे-धीरे पार्कों में बढ़ती गंदगी देखकर उन्हें चिंता होने लगी। उन्होंने महसूस किया कि अगर हर कोई सिर्फ शिकायत करता रहेगा और सफाई के लिए किसी दूसरे का इंतजार करेगा, तो हालात नहीं बदलेंगे। इसी सोच के साथ उन्होंने खुद सफाई की शुरुआत की। उनकी कहानी यह साबित करती है कि देश सेवा केवल सीमा पर जाकर ही नहीं होती, बल्कि समाज को बेहतर बनाने का हर प्रयास भी सच्ची सेवा है।

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